मालथौन के आदिवासी की मौत के मामले में मध्य प्रदेश डीजीपी ने गठित की एसआईटी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नए सिरे से जांच

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मालथौन के आदिवासी की मौत के मामले में मध्य प्रदेश डीजीपी ने गठित की एसआईटी, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर नए सिरे से जांच
भोपाल। सागर जिले में मालथौन के नीलेश आदिवासी की मौत के मामले में मध्य प्रदेश पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाना ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। यह विशेष जांच दल जल्दी ही अपना काम शुरू करेगा।

अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक,सायबर सेल भोपाल के डीआईजी ए.शियास (वर्ष 2008 )को जांच दल का प्रमुख बनाया गया है। वहीं दो अन्य सदस्य के तौर पर भोपाल जोन चार के डीसीपी मयूर खंडेलवाल (वर्ष 2020 )व ग्वालियर में पदस्थ अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनु बेनीवाल (वर्ष 2022) को एसआईटी में शामिल किया गया है। तीनों ही अधिकारी मप्र कैडर के लेकिन मप्र से बाहर अन्य राज्यों के रहवासी हैं।

जल्दी ही जांच अपने हाथ में लेगी एसआईटी
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक,यह विशेष जांच दल अपने गठन के तत्काल बाद ही काम शुरू कर,नीलेश की मौत एवं इससे जुड़ी जांच के दस्तावेज अपने अधिकार में लेगा। दरअसल,प्रकरण में स्थानीय पुलिस की भूमिका संदेह के दायरे में रही है। इसके चलते न्यायालय ने एसआईटी गठन को लेकर इसमें मप्र मूल के अधिकारियों एवं सीधी भर्ती के आईपीएस को शामिल करने की बात विशेष तौर पर कही है। एसआईटी में शामिल उक्त तीनों ही अधिकारियों का गृह राज्य मप्र नहीं है।

विरोधाभाषी बयानों ने उलझाई मौत की गुत्थी
सागर जिले के मालथौन कस्बे में इसी साल 25 जुलाई को 42 वर्षीय नीलेश आदिवासी ने अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। इस मामले में मृतक की पत्नी रेवाबाई व उनके देवर के अलग—अलग बयानों ने नीलेश की मौत की गुत्थी को उलझा दिया। रेवाबाई प्रकरण में सियासी कारणों से आरोपी बनाए गए एक बीजेपी नेता गोविंद सिंह राजपूत के पक्ष में हैं,जबकि देवर स्थानीय पुलिस की विवेचना के साथ। इसके चलते उच्चतम न्यायालय ने एसआईटी गठित कर इसकी निष्पक्ष,स्वतंत्र व पारदर्शी जांच कराने का फैसला गत गुरुवार को सुनाया था। इसमें दो दिन में एसआईटी गठित करने के निर्देश मप्र पुलिस महानिदेशक को दिए गए थे।

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