छिंदवाड़ा में पाइप फैक्ट्री में लगी भीषण आग

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छिंदवाड़ा में पाइप फैक्ट्री में लगी भीषण आग
छिंदवाड़ा में जिला मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित इमलीखेड़ा इंडस्ट्रियल एरिया में शुक्रवार को उस वक्त भारी अफरा-तफरी मच गई, जब यहाँ की एक प्रमुख पीवीसी पाइप फैक्ट्री ‘गुप्ता इंडस्ट्रीज’ में भीषण आग लग गई. प्लास्टिक मटेरियल और केमिकल की मौजूदगी के कारण आग ने देखते ही देखते इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि लगभग 20 हजार स्क्वायर फीट में फैला पूरी फैक्ट्री का परिसर आग की लपटों से घिर गया.

आसमान में धुएं का काला गुबार इतना घना था कि वह एक किलोमीटर दूर से ही स्पष्ट दिखाई दे रहा था, जिसे देखकर आसपास के ग्रामीण और राहगीरों की भारी भीड़ जमा हो गई. फैक्ट्री संचालक प्रकाश गुप्ता के अनुसार, आग की शुरुआत सुबह लगभग 10 बजे शॉर्ट सर्किट की वजह से हुई थी. उन्होंने बताया, “हमने फैक्ट्री में फायर प्रोटेक्शन सिस्टम लगा रखा था, लेकिन दुर्भाग्यवश जैसे ही आग भड़की, पावर सप्लाई बंद हो गई. बिजली न होने के कारण पंप चालू नहीं हो सके और हम चाहकर भी कुछ नहीं बचा पाए.”

सूचना देने के करीब एक घंटे बाद दमकल की गाड़ियां पहुंचीं
संचालक ने नगर निगम पर भी देरी से पहुंचने का आरोप लगाते हुए कहा कि सूचना देने के करीब एक घंटे बाद दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं. आग की लपटों के बीच संचालक ने साहस दिखाते हुए जेसीबी से ऑफिस की बाउंड्रीवाल तुड़वाई और अंदर रखी करीब 4 लाख रुपये की नगदी को सुरक्षित बाहर निकाला. अनुमान है कि इस अग्निकांड में 40 से 50 लाख रुपये का माल जलकर राख हो गया है.

एसडीएम सुधीर जैन पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात रहे
इस घटना की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली टीआई आशीष धुर्वे और एसडीएम सुधीर जैन पुलिस बल के साथ मौके पर तैनात रहे. एसडीएम सुधीर जैन ने बताया, हमें दोपहर 12 बजे आग की सूचना मिली थी. तत्काल छिंदवाड़ा नगर निगम के अलावा अमरवाड़ा, चौरई और परासिया से भी दमकलें बुलाई गईं. कुल 12 फायर ब्रिगेड की मदद ली गई और पानी में फोम मिलाकर करीब 4 घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग को नियंत्रित किया गया. अन्य फैक्ट्रियों को सुरक्षित रखने के लिए वहां से ज्वलनशील पदार्थ पहले ही हटवा दिए गए थे.

सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल
आगजनी की इस घटना ने औद्योगिक सुरक्षा की पोल खोल दी है. नगर निगम के फायर इंचार्ज अभिनव दुबे ने खुलासा किया कि “इस फैक्ट्री सहित क्षेत्र की अन्य कई इकाइयों ने अनिवार्य ‘फायर सेफ्टी NOC’ नहीं ली थी. निगम द्वारा इन्हें पूर्व में कई बार नोटिस दिए गए थे लेकिन निर्देशों की अनदेखी की गई. फिलहाल पुलिस प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और घटना की तकनीकी जांच जारी है.

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