द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर करें ये 3 उपाय, मिलेगी सफलता

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द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर करें ये 3 उपाय, मिलेगी सफलता
हिंदू धर्म में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है जो अपने भक्तों की सभी बाधाएं दूर कर देते हैं. हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है. इन चतुर्थियों में फाल्गुन मास की चतुर्थी का विशेष महत्व है. इसे द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है. मान्यता है कि इस दिन गणेश का द्विजप्रिय स्वरूप पूजा से मन की शांति, उत्तम स्वास्थ और धन की प्राप्ति होती है.

2026 की तिथि और शुभ संयोग
साल 2026 में द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 5 फरवरी, गुरुवार को है. गुरुवार स्वयं भगवान विष्णु का दिन है और चतुर्थी गणेश जी की, यही कारण है कि यह संयोजन बेहद शुभ फलदायी माना जाता है.

द्विजप्रिय संकष्टी क्यों है खास
द्विजप्रिय का अर्थ है वे जो द्विज अर्थात दो बार जन्म लेने वालों को प्रिय होते हैं. गणेश जी का यह रूप चार भुजाओं वाला और शुभ्र वर्ण का है. यह दिवस उन लोगों के लिए वरदान जैसा है जिन्हें शिक्षा, करियर या कर्ज जैसी परेशानियों का सामना करना पड रहा है. परंपरा के अनुसार चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही इस व्रत को पूर्ण माना जाता है.

करें ये प्रभावशाली उपाय
ऋणहर्ता दूर्वा अर्पण
कर्ज से मुक्ति पाने के लिए यह विधि बेहद प्रभावी मानी जाती है. 21 दूर्वा की गांठें लेकर उन्हें कलावा से बुनकर माला बनाएं. इस माला पर हल्दी का तिलक लगाएं और गणेश के हृदय स्थल पर अर्पित करें. अर्पण करते समय 108 बार ‘ओम ऋणहर्ताय नम:’ का जाप करें. इस उपाय से अटके धन की वापसी और पुराने कर्ज से छुटकारा मिलता है.
गुड और गाय के घी का भोग

गरीबी दूर करने के लिए यह उपाय शुभ फलदायी कहा गया है. एक छोटी मिट्टी की कुल्हड में गुड की डली और शुद्ध गाय का घी भरें. इसे गणेश जी के समक्ष स्थापित करें. पूजा के बाद कुछ प्रसाद गाय को खिलाएं और बाकी अपने परिवार में बाटें. गुड मंगल का प्रतीक है और घी लक्ष्मी माता को प्रिय माना जाता है. यह सकारात्मक ऊर्जा बढाने में सहायक है.

शमी पत्र और अक्षत का प्रयोग
करियर में सफलता के लिए यह उपाय उपयोगी है. संकष्टी चतुर्थी की शाम को पांच शमी पत्र गणेश जी को चढाएं. प्रत्येक पत्ते के साथ साबुत अक्षत रखें. पूजा के उपरांत इन अक्षत के दानों को अपने पर्स

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