कैब-टैक्सी चालकों की मनमानी से मुश्किल में महिलाएं, 5 साल में 12 लाख शिकायतें दर्ज

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कैब-टैक्सी चालकों की मनमानी से मुश्किल में महिलाएं, 5 साल में 12 लाख शिकायतें दर्ज
केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (सीसीपीए) ने रेपिडो पर ‘पांच मिनट में ऑटो या 50 रुपये’ के भ्रामक विज्ञापनों के लिए 10 लाख का जुर्माना लगाया। वजह साफ है कि ग्राहकों को न तो समय पर राइड मिली और न ही मुआवजा। यह कार्रवाई कैब कंपनियों की मनमानी पर सवाल उठाती है, जो किराए में हेरफेर, राइड कैंसिलेशन और असुरक्षित व्यवहार जैसे मुद्दों से ग्राहकों को परेशान करती हैं।

देश में 20 लाख टैक्सियां रजिस्टर्ड
सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की 2024-25 की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारत में कुल रजिस्टर्ड टैक्सियों/कैब की संख्या लगभग 20 लाख है। इसमें पारंपरिक टैक्सी, रेडियो टैक्सी और ऐप-आधारित राइड-हेलिंग सेवाएं (जैसे ओला, उबर, रेपिडो) शामिल हैं। इनमें से 85% (17 लाख) असंगठित क्षेत्र से हैं, जबकि 15% (3 लाख) संगठित क्षेत्र (ऐप-आधारित और फ्लीट ऑपरेटर्स) से हैं।

ग्राहकों की शिकायतें और ड्राइवर दुराचार के मामले
पिछले पांच वर्षों (2020-2024) में कैब कंपनियों के खिलाफ करीब 12 लाख ऑनलाइन और ऑफलाइन शिकायतें दर्ज की गईं। किराए में हेरफेर (40%), राइड कैंसिलेशन (30%), और असभ्य व्यवहार (20%) से संबंधित हैं। महिलाओं, बच्चों, और बुजुर्गों के साथ दुराचार के 15,000 मामले सामने आए, जिनमें 1,200 रेप और छेड़छाड़ के मामले शामिल हैं। दिल्ली (500 मामले), मुंबई (300), और बेंगलुरु (250) में सबसे अधिक मामले दर्ज हुए।

कहां हैं कितनी टैक्सियां रजिस्टर्ड?
तमिलनाडु, महाराष्ट्र, और उत्तर प्रदेश सबसे अधिक रजिस्टर्ड टैक्सियां हैं। तमिलनाडु में 4.62 लाख, महाराष्ट्र में 3.5 लाख, और उत्तर प्रदेश में 2.5 लाख, दिल्ली (1.8 लाख), कर्नाटक (1.5 लाख), और पश्चिम बंगाल (1.2 लाख) कैब-टैक्सियां रजिस्टर्ड हैं। मध्य प्रदेश में लगभग 1 लाख टैक्सियां पंजीकृत हैं। इसी प्रकार मुंबई (86,000), दिल्ली (70,000), और बेंगलुरु (50,000) में सबसे अधिक ऐप बेस्ड कंपनियों की टैक्सियां हैं।

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